📝 रचना शीर्षक: [बुढ़ापा - नई हरयाणवी रागणी ]
👤 कवि का नाम: [Anand Kumar Ashodhiya]
🎶 किस्सा / शैली: [फुटकड़ रागणी]
🔖 Labels: [Anand Kumar Ashodhiya, फुटकड़ रागणी]
✍️ रचना:
बुढ़ापा - नई हरयाणवी रागणी
बचपन बीत्या, गई जवानी, फेर बैरी बुढ़ापा आवै सै
घर कुणबा भरपूर बुढ़ापा, एकला ए खड़या लखावै सै
मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा, हर दर पै शीश झुकाया था
थान अर खेड़ा दादा पित्तर, मना कै जल चढ़ाया था
मांग मांग कै हर दर पै मन्नत, बेटे का सुख पाया था
तेरी खुशी तै बढ़कै बेटा, ना दुनिया में सुख चाहया था
पुत्र पा कै मात पिता भाई, मन ही मन हर्षावै सै
पेट काट कै पढ़ा दिया, तूं सरकारी अफसर बणग्या
देख देख कै तेरी तरक्की, म्हारा सिर भी न्यू तणग्या
फेर ऐसा पल्टा लिया काळ नै तूं लव मैरिज पै ठणग्या
मार कै ठोकर सब क्याहे कै बदनामी नै सिर खिणग्या
इब पोता पोती नै आगै करकै, क्यूं मोह का जाळ फलावै सै
तेरी बहु के डर तै घर का, कुणा कूणा कांपै सै
इसी मास्टरणी लाग रही, म्हारा खाणा तक भी नापै सै
सास ससुर नै लगा काम पै, नौकर की ज्यूं राखै सै
पशुआं तै भी बदतर ज़िंदगी, मार कामड़े हांकै सै
म्हारी आत्मा घायल करकै क्यूं अपणा भाग रूसावै सै
धूरत लोभी लंपट कपटी, यो बेटा नहीं हवाला सै
अपना ए सिक्का जर हो तै फेर उसका राम रुखाला सै
वृद्ध आश्रम की त्यारी करली, म्हारी ज्यान का गाला सै
गुरू पालेराम भी जांच परखग्या, यो आनन्द शाहपुर आला सै
जिस आंगण में जन्म लिया क्यूं उसतै दूर भगावै सै
कॉपीराइट©आनन्द कुमार आशोधिया 2024-25
📜 कवि परिचय:
[Anand Kumar Ashodhiya — "हरियाणवी रागणी कवि]
© [Anand Kumar Ashodhiya], सभी अधिकार सुरक्षित।

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