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Sunday, August 10, 2025

चुनावी रागणी - शतुरमुर्ग : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

📝 रचना शीर्षक: चुनावी रागणी - शतुरमुर्ग   


👤 कवि का नाम: Anand Kumar Ashodhiya   

 

🎶 किस्सा / शैली: फुटकड़ रागणी  


🔖 Labels: Anand Kumar Ashodhiya, फुटकड़ रागणी, रागणी 


चुनावी रागणी - शतुरमुर्ग   


विकास का मुद्दा ठावण आळी, वा पार्टी पड़कै सो ली 

जो सरकार बणाई थी वा, मनै पाँच बरस तक रो ली 


शाल दुशाले काम्बळ काळे, मनै धर लिए तह लगाकै

देशी इंग्लिश की पेटी भी, मनै धर ली गिणा गिणाकै

अरै वोट कितै और चोट कितै, मैं आग्या बटण दबाकै

नाच नाच कै ढोल बजाया, मनै पंगु सरकार बणाकै

इब शतुरमुर्ग की तरिया मनै, रेत में नाड़ गडो ली

जो सरकार बणाई थी वा, मनै पाँच बरस तक रो ली 


देख देख कै नोटां की तह, मनै मन की लौ बुझा दी 

अरै बेगैरत की ढाळ आत्मा, देकै लोभ सुवा दी 

ले ले कै नै नोट करारे, मनै बोगस वोट घला दी 

ज़मीर बेचकै सोदा पाड़या, बोटां की झड़ी लगा दी 

इब पछता कै के फायदा जब, पाप में टाँग डबो ली 

जो सरकार बणाई थी वा, मनै पाँच बरस तक रो ली 


कदे धर्म पै कदे जात पै, कदे माणस ऊपर हार गया 

कदे नामा कदे जड़ का सामा, वोट के ऊपर वार गया 

कदे इंग्लिश कदे घर की काढी, गळ के नीचै तार गया 

झूठ कपट बेईमानी का नश्तर, सबके भीतर पार गया 

सच की घीटी पै पांह धरकै, मनै पाप की गठड़ी ढो ली 

जो सरकार बणाई थी वा, मनै पाँच बरस तक रो ली 


सही समय पै सही माणस नै, चुणने में हम फेल रहे 

गुरु पालेराम की बोट की खातिर, बड़े बड़े पापड़ बेल रहे 

अपणी बात बणावण खातिर, झूठ बवण्डर पेल रहे 

पाप की लकड़ी, सच की गिंडु, टोरम टोरा खेल रहे 

"आनन्द शाहपुर" चेत खड़या हो, क्यूँ नाश की राही टोह ली 

जो सरकार बणाई थी वा, मनै पाँच बरस तक रो ली 


कॉपीराइट©आनन्द कुमार आशोधिया 2024-25

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बुढ़ापा - नई हरयाणवी रागणी : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)



📝 रचना शीर्षक: [बुढ़ापा - नई हरयाणवी रागणी ]

👤 कवि का नाम: [Anand Kumar Ashodhiya]

🎶 किस्सा / शैली: [फुटकड़ रागणी]

🔖 Labels: [Anand Kumar Ashodhiya, फुटकड़ रागणी]


✍️ रचना:

बुढ़ापा - नई हरयाणवी रागणी 


बचपन बीत्या, गई जवानी, फेर बैरी बुढ़ापा आवै सै 

घर कुणबा भरपूर बुढ़ापा, एकला ए खड़या लखावै सै 


मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा, हर दर पै शीश झुकाया था 

थान अर खेड़ा दादा पित्तर, मना कै जल चढ़ाया था

मांग मांग कै हर दर पै मन्नत, बेटे का सुख पाया था 

तेरी खुशी तै बढ़कै बेटा, ना दुनिया में सुख चाहया था 

पुत्र पा कै मात पिता भाई, मन ही मन हर्षावै सै 


पेट काट कै पढ़ा दिया, तूं सरकारी अफसर बणग्या

देख देख कै तेरी तरक्की, म्हारा सिर भी न्यू तणग्या

फेर ऐसा पल्टा लिया काळ नै तूं लव मैरिज पै ठणग्या 

मार कै ठोकर सब क्याहे कै बदनामी नै सिर खिणग्या

इब पोता पोती नै आगै करकै, क्यूं मोह का जाळ फलावै सै 


तेरी बहु के डर तै घर का, कुणा कूणा कांपै सै

इसी मास्टरणी लाग रही, म्हारा खाणा तक भी नापै सै 

सास ससुर नै लगा काम पै, नौकर की ज्यूं राखै सै 

पशुआं तै भी बदतर ज़िंदगी, मार कामड़े हांकै सै 

म्हारी आत्मा घायल करकै क्यूं अपणा भाग रूसावै सै


धूरत लोभी लंपट कपटी, यो बेटा नहीं हवाला सै 

अपना ए सिक्का जर हो तै फेर उसका राम रुखाला सै 

वृद्ध आश्रम की त्यारी करली, म्हारी ज्यान का गाला सै 

गुरू पालेराम भी जांच परखग्या, यो आनन्द शाहपुर आला सै 

जिस आंगण में जन्म लिया क्यूं उसतै दूर भगावै सै

कॉपीराइट©आनन्द कुमार आशोधिया 2024-25 


📜 कवि परिचय:

[Anand Kumar Ashodhiya — "हरियाणवी रागणी कवि]


© [Anand Kumar Ashodhiya], सभी अधिकार सुरक्षित।

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आज्या राखी बंधा ज्या भाई : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

आज्या राखी बंधा ज्या भाई


👤 कवि का नाम: [आनन्द कुमार आशोधिया]

🎶 किस्सा / शैली: [फुटकड़ रागणी]

🔖 Labels: [आनन्द कुमार आशोधिया, फुटकड़, करुण]


✍️ रचना:

आज्या राखी बंधा ज्या भाई


आज्या राखी बंधा ज्या भाई, बाहण पुकारे तेरी याद में।

सुन्नी तेरी कलाई भाई, जाइए तूँ बॉर्डर ऊपर बाद में।।


तूँ आया जब खुशी खुशी में, घर घर बंटी मिठाई।

बाळक सी थी फिरूँ नाचती, फूली नही समाई।।

भाई आग्या घर म्हारै, सारै गाती फिरूँ थी दिन और रात में।।


दसमी कर के कॉलेज पढ़ग्या, भर्ती हुया फौज में।

भारत माँ की करे नौकरी, कुनबा हुया मौज में ।।

रोज मैं याद करूँ मेरे बीरा, आणा था इबकै तन्ने साढ़ में।।


सामण आग्या, झूले पड़गे, मन में खुशी समाई।

सारे गाम में रुक्का पड़ग्या, छूटी आग्या भाई।।

ल्याई प्रेम की राखी रे बुणके, प्यारे से भाई के लाड में।।


कोए बहाना इब ना चाले, नेग लेऊँगी डटके।

हाथ बढ़ा ल्या राखी बाँधू, वारी जाऊं सदके।।

जबते आनन्द भाई ते फेटी, मानूँ सूँ घणी ए उसकी ठाढ़ मैं।।


📜 कवि परिचय:

[आनन्द कुमार आशोधिया — : "हरियाणवी रागणी के क्षेत्र में सक्रिय, मंचीय कवि, लोक-संस्कृति के संवाहक"]


© [आनन्द कुमार आशोधिया], सभी अधिकार सुरक्षित।

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