Thursday, October 22, 2026

असली दर्द - नई हरयाणवी रागणी : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)


असली दर्द - नई हरयाणवी रागणी 

तूँ छोड़ कै गई मनै कोए गम ना था,
तूँ बोलती भी कोन्या यो भी कम ना था
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया,
जब देखकै भी मनै तूँ इगनोर मारगी

मैं रोवता रहया जँग झोवता रहया
चैन खोवता रहया तनै टोहवता रहया
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब फोन पै भी आपां नै ब्लोक मारगी
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब देखकै भी मनै तूँ इगनोर मारगी

मन मार भी लिया तन हार भी लिया
तेरे प्यार का यो भूत सिर तै तार भी लिया
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब यारां की तूँ म्हारे स्यामही बोर मारगी
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब देखकै भी मनै तूँ इगनोर मारगी

मन रूठ भी गया, दिल टूट भी गया
तेरे प्यार आळा भांडा इब फ़ूट भी गया
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब म्हारे पैसे खा कै नै तूँ चोर मारगी
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब देखकै भी मनै तूँ इगनोर मारगी

गैरां की बाँहयां में तूँ झूल भी गई
इस आनन्द के प्यार नै तूँ भूल भी गई
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब गळे में लपेट साँप मोर मारगी
पर असली दर्द मेरै इस बात का हुया, जब देखकै भी मनै तूँ इगनोर मारगी

कॉपीराइट©️आनन्द कुमार आशोधिया©2026 

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